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केदारनाथ यात्रा मार्ग पर अश्ववंशीय पशुओं के कल्याण के लिये बैठक आयोजित

रुद्रप्रयाग। “पशु क्रूरता निवारण समिति” के अंतर्गत श्री केदारनाथ धाम में पैदल यात्रा मार्ग पर संचालित घोड़े-खच्चरों (अश्ववंशीय पशुओं) के कल्याण के लिए गठित परामर्शदात्री समिति की दसवीं बैठक शुक्रवार को जिला कार्यालय सभागार में आयोजित की गई। बैठक की अध्यक्षता जिलाधिकारी विशाल मिश्रा ने की, जिसमें विभिन्न विभागों के अधिकारियों, पशु चिकित्सकों तथा पशु कल्याण से जुड़े संगठनों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया। बैठक का मुख्य उद्देश्य आगामी श्री केदारनाथ धाम यात्रा को ध्यान में रखते हुए यात्रा मार्ग पर संचालित होने वाले घोड़े-खच्चरों की सुरक्षा, स्वास्थ्य, पोषण एवं समुचित देखभाल सुनिश्चित करना था। जिलाधिकारी ने स्पष्ट किया कि तीर्थयात्रियों की सुविधा जितनी महत्वपूर्ण है, उतना ही आवश्यक इन पशुओं का संरक्षण और कल्याण भी है, क्योंकि ये ही यात्रा व्यवस्था का एक महत्वपूर्ण आधार हैं। बैठक के दौरान जिलाधिकारी ने संबंधित अधिकारियों के साथ विभिन्न पहलुओं पर विस्तार से चर्चा करते हुए आवश्यक दिशा-निर्देश जारी किए। उन्होंने निर्देश दिए कि यात्रा अवधि के दौरान सभी घोड़े-खच्चरों को संतुलित एवं पौष्टिक आहार उपलब्ध कराया जाए तथा स्वच्छ पेयजल की समुचित व्यवस्था सुनिश्चित की जाए। इसके साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि पशुओं से उनकी निर्धारित क्षमता से अधिक भार न ढुलवाया जाए और उन्हें अत्यधिक कार्य से बचाने के लिए सख्त निगरानी रखी जाए।

जिलाधिकारी ने पशुओं के नियमित स्वास्थ्य परीक्षण को अत्यंत आवश्यक बताते हुए निर्देश दिए कि यात्रा मार्ग पर पर्याप्त संख्या में पशु चिकित्सा शिविर स्थापित किए जाएं, जहां विशेषज्ञ चिकित्सकों की उपलब्धता सुनिश्चित हो। उन्होंने कहा कि किसी भी पशु के बीमार या घायल होने की स्थिति में तत्काल उपचार की व्यवस्था होनी चाहिए, ताकि किसी प्रकार की गंभीर स्थिति उत्पन्न न हो। इसके अतिरिक्त बैठक में अश्ववंशीय पशुओं के लिए यात्रा मार्ग पर उपयुक्त विश्राम स्थलों एवं सुरक्षित आश्रयों की व्यवस्था सुनिश्चित करने पर भी विस्तार से विचार-विमर्श किया गया। जिलाधिकारी ने कहा कि विश्राम स्थलों पर छाया, पानी और आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएं, जिससे पशुओं को समय-समय पर आराम मिल सके और उनकी कार्यक्षमता बनी रहे। जिलाधिकारी ने पशु क्रूरता रोकने से संबंधित नियमों का कड़ाई से पालन सुनिश्चित करने के निर्देश देते हुए कहा कि यदि कोई व्यक्ति पशुओं के साथ अमानवीय व्यवहार करता हुआ पाया जाता है, तो उसके विरुद्ध सख्त कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने संबंधित विभागों को निर्देशित किया कि सभी व्यवस्थाएं यात्रा प्रारंभ होने से पूर्व ही समयबद्ध एवं प्रभावी रूप से पूर्ण कर ली जाएं, ताकि यात्रा के दौरान किसी प्रकार की अव्यवस्था न हो। बैठक में पीपूल फॉर एनिमल्स की प्रतिनिधि गौरी मौलेखी ने भी अपने विचार रखते हुए कहा कि केदारनाथ यात्रा के दौरान पशुओं के कल्याण को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जानी चाहिए। उन्होंने सुझाव दिया कि पशुओं के पंजीकरण, ट्रैकिंग, स्वास्थ्य निगरानी और कार्य समय के निर्धारण के लिए आधुनिक तकनीकों का उपयोग किया जाए, जिससे पारदर्शिता और प्रभावशीलता बढ़ाई जा सके। उन्होंने यह भी कहा कि पशु मालिकों को समय-समय पर जागरूक किया जाना आवश्यक है, ताकि वे पशुओं के प्रति संवेदनशील व्यवहार अपनाएं।

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