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उत्तराखंड के लोगों के जीवन में सकारात्मक बदलाव ला रही है पैनासोनिक की सीएसआर पहल

हरिद्वार । उत्तराखंड के हरिद्वार स्थित संतरशाह गाँव की संकरी गलियों में स्थित एक साधारण-सी मोबाइल मरम्मत की दुकान सचिन टेलीकॉम पूरे दिन ग्राहकों से भरी रहती है। इसके मालिक सोनू गिरी के लिए यह दुकान केवल आजीविका का साधन नहीं है यह इस बात का प्रमाण है कि सही कौशल के साथ मिला अवसर पूरे परिवार की दिशा और दशा बदल सकता है।कुछ ही वर्ष पहले सोनू स्थायी रोजगार की तलाश में संघर्ष कर रहे थे। ग्रामीण और अर्ध-शहरी भारत के अनेक युवाओं की तरह, आर्थिक सीमाओं के कारण उच्च शिक्षा उनके लिए संभव नहीं थी।पैनासोनिक की सीएसआर पहल के अंतर्गत संचालित एंकर स्किल स्कूल में मोबाइल रिपेयरिंग कोर्स में नामांकन उनके जीवन का निर्णायक मोड़ साबित हुआ। आज सोनू न केवल नियमित आय अर्जित कर रहे हैं, बल्कि अपने समुदाय में रोजगार भी सृजित कर रहे हैं,और आत्मनिर्भरता व प्रेरणा का प्रतीक बन चुके हैं।सोनू की कहानी पैनासोनिक द्वारा समर्थित कौशल विकास कार्यक्रमों के माध्यम से हुए लगभग 3,000 ऐसे परिवर्तनों में से एक है। शिक्षा और रोजगार के बीच की खाई को पाटने के उद्देश्य से तैयार ये कार्यक्रम विद्युत असेंबली, मोल्डिंग मशीन संचालन, मोबाइल एवं घरेलू उपकरण मरम्मत जैसे उद्योग-संगत व्यावसायिक प्रशिक्षण प्रदान करते हैं।

80 प्रतिशत से अधिक प्लेसमेंट एवं स्वरोजगार परिणामों के साथ, ये पहलें भारत की जमीनी अर्थव्यवस्था को सशक्त बना रही हैं।इसका प्रभाव केवल व्यक्तिगत आय तक सीमित नहीं है, बल्कि पूरे परिवारों में दिखाई देता है। जो परिवार पहले मौसमी खेती या दिहाड़ी मजदूरी पर निर्भर थे, उनकी वार्षिक आय में लगभग 50 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। पहली पीढ़ी के कमाने वालों के लिए 11,000 रूपये से 26,000 रूपये की मासिक आय ने आर्थिक स्थिरता, पलायन के दबाव में कमी और सम्मानजनक जीवन प्रदान किया है।
कमिनी जैसी महिलाओं के लिए यह परिवर्तन केवल आँकड़ों तक सीमित नहीं है। एक किसान परिवार से आने वाली कमिनी को तकनीकी पाठ्यक्रम चुनने पर सामाजिक विरोध का सामना करना पड़ा। बावजूद इसके, उन्होंने विद्युत असेंबली प्रशिक्षण पूरा किया और एक विनिर्माण इकाई में नौकरी प्राप्त की। एक वर्ष के भीतर ही कमिनी अपने परिवार की आय में योगदान देने लगीं और अपने गाँव की लड़कियों के लिए प्रेरणा बन गईं,यह सिद्ध करते हुए कि कौशल सामाजिक बाधाओं को तोड़ सकता है

।सशक्तिकरण में सुरक्षा और आत्मविश्वास की भूमिका को समझते हुए, पैनासोनिक की सीएसआर पहल के अंतर्गत पाँच सरकारी विद्यालयों एवं छात्रावासों में 4,200 किशोरियों को आत्मरक्षा प्रशिक्षण प्रदान किया गया। संरचित मार्शल आर्ट्स और शारीरिक आत्म-सुरक्षा सत्रों के माध्यम से लड़कियों में शारीरिक शक्ति, परिस्थितिजन्य समझ और आत्मविश्वास विकसित किया गया। कई प्रतिभागियों के लिए यह संगठित खेल या आत्मरक्षा शिक्षा का पहला अनुभव था, जिसने उन्हें भय से उबरने और सार्वजनिक स्थानों में आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ने में सहायता की।
उद्यमिता भी इस पहल का एक सशक्त परिणाम बनकर उभरी है। हरिद्वार के हलजोरा गाँव में गुढ़िया की फास्ट-फूड ठेलियाँ, पैनासोनिक की सीएसआर समर्थित उद्यम पहल के माध्यम से एक सफल सूक्ष्म व्यवसाय में परिवर्तित हो गईं। जो शुरुआत घरेलू खाना बनाने से हुई थी, वह आज लगभग 18,000 रूपये प्रति माह की आय अर्जित कर रही है। इस सफलता से प्रेरित होकर उनके पति ने अपनी फैक्ट्री की नौकरी छोड़ दी और परिवार के साथ इस उद्यम में जुड़ गए,जिससे यह पहल सामूहिक आजीविका और सामुदायिक गर्व का स्रोत बन गई।पैनासोनिक की सीएसआर दृष्टि यह मानती है कि स्वास्थ्य और पोषण सुरक्षा के बिना आर्थिक सशक्तिकरण टिकाऊ नहीं हो.

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