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माँ जानकी के दिव्य प्राकट्य दिवस के अवसर पर कार्यक्रमों का आयोजन

ऋषिकेश, 10 फरवरी। माँ जानकी के दिव्य प्राकट्य दिवस के पावन अवसर पर परमार्थ निकेतन में विशेष यज्ञ एवं आध्यात्मिक कार्यक्रमों का आयोजन किया गया। परमार्थ गुरुकुल के ऋषिकुमारों ने विश्व शांति, समृद्धि और मानवता के कल्याण हेतु वैदिक मंत्रोच्चार के साथ सामूहिक यज्ञ सम्पन्न किया। गंगा तट पर दिव्य गंगा आरती, रामनाम संकीर्तन और भक्ति की पावन धारा में समस्त वातावरण आध्यात्मिक ऊर्जा से आलोकित हो उठा। स्वामी चिदानन्द सरस्वती ने संदेश दिया कि माँ जानकी धैर्य की वह निःशब्द शक्ति हैं, जो हर पीड़ा को तप बनाकर प्रकाश में बदल देती हैं। वे त्याग, मर्यादा, करुणा और आंतरिक सामर्थ्य की जीवंत प्रतिमा हैं। उनका जीवन सिखाता है कि पवित्रता ही सबसे बड़ा साहस है। आज जब समाज तनाव, असंतुलन और मूल्यहीनता की चुनौतियों से जूझ रहा है, माँ जानकी का आदर्श हमें अपनी जड़ों, संस्कारों और आत्मसम्मान से जुड़ने की प्रेरणा देता है। उन्होंने विपरीत परिस्थितियों में भी सत्य, प्रेम और स्वाभिमान का मार्ग नहीं छोड़ा। वे सिखाती हैं कि कोमलता कमजोरी नहीं, बल्कि अदम्य शक्ति है। यह दिवस हम सभी को संकल्प दिलाता है कि नारी गरिमा का सम्मान करें, सेवा, संवेदना और संस्कारों को जीवन में उतारें तथा एक समरस, संवेदनशील और संस्कारित समाज के निर्माण में सहभागी बनें। यही माँ जानकी के प्रति सच्ची श्रद्धांजलि है।

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