तीन दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन

देहरादून, 13 जनवरी। रूरल लिटिगेशन एंड एंटाइटलमेंट केंद्र (आरएलईके) ने आरएलईके द्वारा संचालित विद्यालयों के प्रधानाध्यापकों के लिए तीन दिवसीय क्षमता निर्माण एवं प्रशिक्षण कार्यक्रम का सफलतापूर्वक आयोजन किया। इस कार्यक्रम का उद्देश्य डिजिटल क्षमता को सुदृढ़ करना, नेतृत्व कौशल विकसित करना, शिक्षण पद्धतियों में सुधार लाना तथा उत्तराखंड और उत्तर प्रदेश के मोहंड स्थित आरएलईके विद्यालयों में समग्र शैक्षणिक गुणवत्ता को बढ़ाना था। कार्यक्रम का शुभारंभ पंजीकरण के साथ हुआ, जिसके बाद उद्घाटन एवं स्वागत सत्र का आयोजन किया गया। इस सत्र का नेतृत्व आरएलईके की अध्यक्षा श्रीमती प्रतिमा मेनन ने किया। उन्होंने आरएलईके की परिवर्तनकारी यात्रा पर विस्तृत एवं प्रेरणादायक संबोधन देते हुए सामाजिक न्याय और ग्रामीण शिक्षा के क्षेत्र में संगठन की दीर्घकालिक भूमिका को रेखांकित किया।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि डॉ. सुधी नाथ, निदेशक – सोशल एवं पब्लिक हेल्थ डिवीजन, बीसीटीए, इंडिया ने प्रधानाध्यापकों की भूमिका पर प्रकाश डालते हुए समावेशी और मूल्य-आधारित शिक्षा के महत्व को बताया। डॉ. सुधी नाथ ने ग्रामीण शिक्षा के प्रति उनके समर्पण के लिए प्रधानाध्यापकों को सम्मानित भी किया। प्रथम दिन के सत्रों में खेलों के माध्यम से आइस-ब्रेकिंग गतिविधियाँ, आरएलईके के विधि प्रशिक्षु छात्रों द्वारा बेहतर शिक्षण वातावरण निर्माण पर संवादात्मक प्रशिक्षण तथा श्रीमती रेखा ध्यानी द्वारा सामुदायिक सहभागिता पर केंद्रित छात्र नामांकन रणनीतियों पर चर्चा शामिल रही। द्वितीय दिन शैलेश ध्यानी द्वारा डिजिटल क्षमता प्रशिक्षण सत्र आयोजित किया गया, जिसमें दीक्षा ऐप और कक्षा शिक्षण हेतु एआई टूल्स का प्रदर्शन किया गया। इसके साथ ही सहभागितापूर्ण शिक्षण और आनंददायक शिक्षण विधियों पर सत्र हुए।
आरएलईके की अध्यक्षा श्रीमती प्रतिमा मेनन ने बाल सुरक्षा दिशा-निर्देशों एवं पॉश (कार्यस्थल पर लैंगिक उत्पीड़न की रोकथाम) से संबंधित विस्तृत चर्चा का नेतृत्व किया, जिससे विद्यालय नेतृत्व को व्यावहारिक मार्गदर्शन प्राप्त हुआ। दिन का एक अन्य प्रमुख आकर्षण मुख्य अतिथि अधिवक्ता रेनू डी. सिंह (जेंडर राइट्स एक्टिविस्ट) का प्रेरक संबोधन रहा, जिसमें उन्होंने पारंपरिक शिक्षण विधियों और राष्ट्रीय गौरव के संदर्भ में विद्यालयों की भूमिका पर महत्वपूर्ण विचार साझा किए। अधिवक्ता सिंह ने आरएलईके के संस्थापक एवं पद्मश्री से सम्मानित स्व. श्री अवधेश कौशल के सामाजिक न्याय के लिए आजीवन योगदान को नमन किया तथा ग्रामीण शिक्षा को आगे बढ़ाने में श्रीमती प्रतिभा मेनन के दूरदर्शी नेतृत्व की सराहना की। तीसरे एवं अंतिम दिन सभी सत्रों की समग्र समीक्षा की गई, प्रमाणपत्र वितरण किया गया तथा समापन समारोह आयोजित हुआ।
प्रतिभागियों ने अपने अनुभव साझा करते हुए पेशेवर विकास के इस अवसर के लिए आरएलईके के प्रति आभार व्यक्त किया। आरएलईके मोहंड विद्यालय की वरिष्ठ शिक्षिका एवं प्रशिक्षण में सहभागी प्रधानाध्यापिका सुश्री विजय लक्ष्मी ने कहा, “आरएलईके का प्रधानाध्यापकों के लिए डिजिटल क्षमता निर्माण प्रशिक्षण कार्यक्रम अत्यंत आनंददायक और समृद्ध अनुभव रहा।” आरएलईके विद्यालय के एक अन्य सहभागी प्रधानाध्यापक सुलेख चंद ने कहा की “यह क्षमता निर्माण प्रशिक्षण सत्र हमें बेहतर शिक्षक बनने में सहायता करेगा और हम छात्रों के साथ केवल शिक्षक के रूप में ही नहीं, बल्कि साथ सीखने वाले साथी के रूप में भी जुड़ सकेंगे।” कार्यक्रम का समापन सकारात्मक और सशक्त संदेश के साथ हुआ, जिसमें श्रीमती प्रतिमा मेनन के नेतृत्व में आरएलईके की क्षमता निर्माण, शैक्षणिक नेतृत्व और उत्तराखंड के ग्रामीण विद्यालयों के समग्र विकास के प्रति प्रतिबद्धता को पुनः दोहराया गया।



