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मुख्यमंत्री का बयान संवेदना नहीं, जिम्मेदारी से बचने की कोशिश : गणेश गोदियाल

देहरादून, 06 जनवरी। उत्तराखंड कांग्रेस के अध्यक्ष गणेश गोदयाल ने कहा की अंकित भंडारी हत्याकांड को लेकर उर्मिला सनावर के सनसनी ख़ेज़ खुलासों को आज 15 से 20 दिन होने जा रहे हैं और उत्तराखंड के मुख्यमंत्री ने इतने दिन बीत जाने के बाद अंकिता हत्याकांड पर आज कुछ बोला है यह बताता है कि उत्तराखंड की देवतुल्य जनता के लिए मुख्यमंत्री की नजर में क्या महत्व है। गोदियाल ने कहा कि मुख्यमंत्री यह कह रहे हैं कि “हम किसी भी जांच के लिए तैयार हैं” लेकिन सवाल यह है कि तीन साल तक सरकार किस जांच के लिए तैयार थी? अगर सरकार सच में तैयार थी तो तीन साल तक सीबीआई जांच से क्यों भागती रही? हाईकोर्ट के सिटिंग जज की निगरानी में जांच से डर क्यों? गोदियाल ने कहा कि मुख्यमंत्री यह भी कह रहे हैं कि वे अंकिता के माता-पिता से बात करेंगे और “ वह जो आदेश करेंगे वही सरकार करेगी।

” यह बयान संविधान और कानून का अपमान है। जांच माता-पिता के आदेश से नहीं, कानून से होती है। मुख्यमंत्री का काम फैसला लेना है, जिम्मेदारी टालना नहीं। हम मुख्यमंत्री से सीधा सवाल पूछते हैं क्या अब तक सरकार की कोई स्वतंत्र सोच नहीं थी? क्या तीन साल तक सरकार सोती रही? मुख्यमंत्री कह रहे हैं “जो कानूनी रूप से संभव होगा, वह किया जाएगा।” तो फिर बताइए सीबीआई जांच में कौन-सा कानून आड़े आ रहा है? हाईकोर्ट के सिटिंग जज की निगरानी में जांच क्यों असंभव है? गोदियाल ने कहा कि सच यह है कि सरकार अब दबाव में आई है।

प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष  गणेश गोदियाल की “अंकिता भंडारी को न्याय दो” पदयात्रा, जनता का आक्रोश और सच सामने आने का डर इन तीनों ने सरकार को बयानबाजी पर मजबूर कर दिया है। लेकिन बयानो से न्याय नहीं मिलता। रिसोर्ट तोड़ा गया। पुलिस कस्टडी में दो बार आग लगी। सबूत मिटाए गए। और आज मुख्यमंत्री कह रहे हैं “जांच कराएंगे” तीन साल बाद? अध्यक्ष ने कहा कि प्रदेश कांग्रेस की मांग आज भी वही है सीबीआई जांच हो हाईकोर्ट के सिटिंग जज की निगरानी में हो वीआईपी की पहचान सार्वजनिक हो सबूत मिटाने वालों पर कार्रवाई हो अगर मुख्यमंत्री सच में गंभीर हैं, तो आज ही कैबिनेट फैसला लें। घोषणा से नहीं, आदेश से न्याय होता है। गोदियाल ने कहा अंकिता उत्तराखंड की बेटी है, और बेटी के न्याय पर कोई राजनीति स्वीकार नहीं।

 

 

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