उत्तराखंड समाचार

चलती चार धाम यात्रा के दौरान बीकेटीसी के वित्त अधिकारी की कर दी छुट्टी : गरिमा

सेवा नियमावली में मंदिर समिति के मुख्य कार्याधिकारी पद के लिए जो अहर्ता निर्धारित की गई थी

देहरादून 13 जून। उत्तराखंड कांग्रेस की मुख्य प्रवक्ता गरिमा मेहरा दसौनी ने  बदरी-केदार मंदिर समिति में चल रहे बड़े ड्रामे को लेकर विज्ञप्ति जारी की है। दसौनी ने राज्य सरकार से सवाल किया है कि ऐसी क्या मजबूरी थी कि गतिमान चार धाम यात्रा में बीकेटीसी के वित्त अधिकारी की छुट्टी कर दी गई? गरिमा ने बताया कि बीकेटीसी के पिछले बोर्ड ने वित्तीय प्रबंधन के लिए शासन से वित्त अधिकारी का पद सृजित कराया था। शासन ने मंदिर समिति में वित्त अधिकारी का पद सृजित कर इस पर राज्य वित्त सेवा के वरिष्ठ अधिकारी आनंद सिंह को तैनात किया था। गरिमा ने बताया कि वरिष्ठ वित्त अधिकारी आनंद सिंह द्वारा मंदिर समिति में पूर्व से चली आ रही अनियमित वित्तीय परिपाटी पर लगाम लगाई गई और नियम विरुद्ध किए जा रहे आय- व्यय पर आपत्तियां की गई। इस कारण मंदिर समिति में भूचाल जैसा माहौल बन गया। दसौनी के अनुसार नए अध्यक्ष की ताजपोशी होने के बाद मंदिर समिति को दीमक की तरह खोखला कर रहे तंत्र ने सबसे पहले वरिष्ठ वित्त अधिकारी आनंद सिंह को निशाने पर लिया और उनको वहां से भगा कर छोड़ा। दसौनी ने कहा कि यह भी आश्चर्यजनक तथ्य है कि मंदिर समिति के पिछले बोर्ड में पहली बार कार्मिकों के लिए सेवा नियमावली बनी थी। सेवा नियमावली में मंदिर समिति के मुख्य कार्याधिकारी पद के लिए जो अहर्ता निर्धारित की गई थी, उसके हिसाब से मुख्य कार्याधिकारी वरिष्ठ पीसीएस अधिकारी अथवा जूनियर आईएएस अधिकारी होना चाहिए था। सेवा नियमावली में स्पष्ट रूप से उल्लेख किया गया है कि मुख्य कार्याधिकारी प्रथम श्रेणी का राजपत्रित अधिकारी होगा। मगर वर्तमान में जिस व्यक्ति की बतौर मुख्य कार्याधिकारी वहां तैनाती की गई है, वो प्रथम श्रेणी तो छोड़िए द्वितीय श्रेणी का राजपत्रित अधिकारी तक नहीं है। मगर मंडी सचिव के पद पर कार्यरत व्यक्ति की फ़ाइल में शासन ने तथ्यों को छुपा कर और अनदेखा कर उन्हें मंदिर समिति का मुख्य कार्याधिकारी नियुक्त कर दिया। इसकी लिखत शिकायत तत्कालीन मुख्य सचिव राधा रतूड़ी से की गई थी। राधा रतूड़ी ने इस प्रकरण की जांच करने के लिखित आदेश सचिव, धर्मस्व व संस्कृति  को दिए थे।उस जांच का क्या हुआ कुछ पता नहीं। गरिमा ने कहा कि वर्तमान में मंदिर समिति को धर्मस्व व पर्यटन से हटा कर पर्यटन विभाग के अधीन कर दिया गया है। मुख्य कार्याधिकारी की फ़ाइल पर्यटन विभाग में धूल खा रही है। मगर मंदिर समिति में नियम- कानून सिखाने वाले वरिष्ठ वित्त अधिकारी को चलता कर दिया गया है। दसौनी ने कहा कि मंदिर समिति के मुख्य कार्याधिकारी ने कुछ समय पूर्व अपने अधिकार क्षेत्र से बाहर जाकर नियम विरुद्ध तरीके से लगभग 40 कार्मिकों को ACP का लाभ दे दिया था। इस प्रकरण में वित्त अधिकारी को बायपास करके आदेश जारी कर दिए गए थे। वित्त अधिकारी तक यह मामला पहुँचा तो उन्होंने इस पर आपत्ति जताई। मंदिर समिति के अस्थायी कर्मचारी संघ द्वारा इस प्रकरण समेत कई अन्य मामलों की लिखित में शासन से शिकायत कर जांच की माँग की गई थी। मगर वित्तीय अनियमितता की श्रेणी में आने वाले इस प्रकरण पर शासन ने कोई कार्रवाई नहीं की।वित्त अधिकारी को हटाए जाने के प्रमुख कारण हैं कि वित्त अधिकारी ने मंदिर समिति में निर्माण कार्यों से संबंधित टेंडर प्रक्रिया में गड़बड़ी पाए जाने पर उन्हें निरस्त कर दिया। वित्त अधिकारी ने निर्माण कार्यों से लेकर विभिन्न प्रकार की खरीदारी के बिल- वाउचर्स में त्रुटियां पाए जाने पर उन पर रोक लगा दी। एक तरफ़ नियम- कानूनों से चलने वाले वित्त अधिकारी को हटा दिया गया है। तो दूसरी तरफ तमाम गड़बड़ियां करने वाले मुख्य कार्याधिकारी पर मंदिर समिति के अस्थायी कर्मचारियों की लिखित शिकायत के बावजूद कोई कार्यवाही नहीं की जा रही है। गरिमा ने कहा कि राज्य में गतिमान चार धाम यात्रा के दौरान वित्त अधिकारी को हटाए जाना बताता है कि दाल में काला नहीं पूरी दाल ही काली है।

 

 

 

 

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