उत्तराखंड समाचार

छुईमुई का पौधा आंशिक इंडोर प्लांट

कई नामो से जाना जाता हैं छुईमुई

देहरादून। छुईमुई को शेम प्लांट, लाजवंती, संवेदनशील पौधा, टच मी नॉट प्लांट, स्लीपी प्लांट, एक्शन प्लांट जैसे कई नामो से जाना जाता हैं पुकारा जाता हैं। पौधे का वैज्ञानिक नाम  मिमोसा पुडिका है। इसके फूल गुलाबी रंग के तथा छोटे होते हैं। पौधा परिपक्त होने पर आकार में 5 फीट की ऊँचाई तक लंबा हो सकता है।

पौधा कब लगाये

घर पर छुईमुई का पौधा लगाने का सबसे अच्छा समय वसंत ऋतु अर्थात फरवरी से अप्रैल माह के बीच का होता है, लेकिन यदि आप गर्म जलवायु वाले क्षेत्र में रहते हैं, तो आप अत्यधिक ठंड का मौसम छोड़कर, साल भर में इसे किसी भी समय लगा सकते हैं।

पौधा कैसे तैयार करें

पौधे को बीज से, कटिंग से या लेयरिंग विधि से आसानी से तैयार किया जा सकता है। इसके बीज आप आसानी से किसी भी खाद बीज की दुकान से ले सकते हैं। आप तैयार पौधा भी किसी भी नर्सरी से लेकर आ सकते हैं।

पौधे के लिए मिट्टी

छुईमुई के पौधे को मिट्टी हल्की, नम और अच्छी जल निकासी वाली दोमट मिट्टी चाहिए, जिसका पीएच 6 से 7 तक हो। आप घर पर ही बढ़िया उर्वरक वाली मिट्टी भी तैयार कर सकते हैं, इसके लिए 40% सामान्य मिट्टी, 30% वर्मी कम्पोस्ट, 20% रेत और 10% कोकोपीट को अच्छे से मिला कर मिश्रण बनायें, फिर इस पोटिंग साइल को ग्रो बैग में भरें और नमी के लिए पानी दें।

सूर्य प्रकाश या रोशनी

छुईमुई का पौधा आंशिक इंडोर प्लांट है। पौधे को दिन की 8 घंटे की तेज उजाले वाली रोशनी मिलना जरूरी है। अगर कुछ घंटे धूप भी मिल जाता है तो कोई परेशानी नही है, पर अंधेरे या कम उजाले में रखने से पौधा फूल बिल्कुल भी नही देगा। छुईमुई के पौधे की अच्छी ग्रोथ के लिए 15 से 29 डिग्री सेल्सियस का तापमान आदर्श होता है।

पानी

पौधे को प्रतिदिन पानी देने की आवश्यकता नही होती हैं। पर हल्की नमी पौधे को पसंद है। इस लिए नमी बनाकर रखे पर जलभराव से बचें। मिट्टी को कभी भी पूरा सूखने नहीं दे। सीमित मात्रा में ही वृद्धि के अनुसार ही पानी दे।

खाद

पौधे को बढ़ने के लिए खाद की अधिक आवश्यकता नही होती हैं। इस लिए पौधा लगाने के बाद साल में 1 या 2 बार आप इसे वर्मीकम्पोस्ट या गाय के गोबर से तैयार खाद दे सकते है। बढ़ते मौसम में आप प्रत्येक 10-15 दिन के अंतर में कोई भी तरल खाद इस पौधे को दे सकतें है।

मौसमी देखभाल

छुईमुई का पौधा ठंड के प्रति अधिक संवेदनशील होता है। ठंडे मौसम में इसे घर के अंदर ही रखें। सर्दियों में अधिक पानी देने से बचें। तेज गर्मी से भी पौधे की रक्षा करें। पौधे की पत्तियां झुलस सकती है। पौधा सुख भी सकता है। पौधे की जड़ में महीने में 1 से 2 बार फंगीसाइड का प्रयोग जरूर करें।

स्वास्थ लाभ

1) छुईमुई की जड़ स्वाद में अम्लिय तथा कठोर होती है। चरक संहिता के संधानीय एवं पुरीषसंग्रहणीय महाकषाय में तथा सुश्रुत संहिता के प्रियंग्वादि व अम्बष्ठादि गणों में इसकी गणना की गई है।

2) छुईमुई के पौधे में एंटीवायरल गुण होते हैं जो पेट के इंफेक्शन को कम करने के साथ ही पेट की कई बीमारियों से राहत देते हैं।

3) छुईमुई में एनाल्जेसिक गुण होता है, जो दर्द को कम करने का काम कर सकता है। पेट दर्द में इसके पत्तों और शहद के पेस्ट को खाली पेट उपयोग करने की सलाह दी जाती है।

4) छुईमुई का पौधा डायरिया की समस्या में भी राहत पहुंचा सकता है।

5) छुईमुई के पौधे में डायबिटीज कंट्रोल करने वाले भी गुण होते हैं, जो ब्लड शुगर लेवल को कंट्रोल करते हैं।

6) छुईमुई चेहरे पर दाने और मुंहासे से आराम देता है। पत्तियां खून को साफ करने के साथ ही पिंपल को कम करती है।

वास्तु लाभ

वास्तु शास्त्र में छुईमुई के पौधे को बहुत शुभ माना जाता है। इस पौधे को अपने घर के पूर्व दिशा या ईशान कोण में लगाना सबसे ज्यादा शुभ होता है। इन दिशा में रखने से यह पौधा सौभाग्य, समृद्धि और सुरक्षा को आकर्षित करने में मदद करता है। आप इसे नियमित जल दें और इसे मुरझाने से बचाएं। पौधे की नियमित रूप से छंटाई करें और सूखी हुई पत्तियों को हटाते रहें। ऐसा करने से आपकी कुंडली से राहु दोष दूर होता है। ध्यान रखें इस पौधे के आसपास गंदगी ना रहे।

शनि देव को प्रसन्न करने के लिए

छुईमुई का पौधा शनि देव को प्रिय माना जाता है। यह पौधा घर की नकारात्मक ऊर्जा को समाप्त करता है। इस पौधे पर नीले रंग के फूल आते हैं और ऐसा माना जाता है शनि देव को नीला रंग बहुत प्रिय है, इसलिए छुईमुई के फूल से यदि आप शनिदेव की पूजा करते हैं तो आपके जीवन में सदैव खुशहाली बनी रहती है और ये धन को आकर्षित करता है।

 

 

 

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