आखिर कैसे पूरा होगा मतदान प्रतिशत बढ़ाने का लक्ष्य
रोजी रोटी के लिये अपने गांव शहर से दूर जाकर जीवन यापन करने वाले सब लोगों के लिये यह संभव नहीं है

देहरादून। देश के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने मतदान प्रतिशत बढ़ाने की भी अपील करते हुए यह कहा था कि मतदान का मतलब एक मजबूत लोकतंत्र है और मजबूत लोकतंत्र से ही विकसित भारत बनेगा। प्रधानमंत्री की अपील कितना असर दिखायेगी यह तो आने वाले दिनों में पता चल जायेगा। जल्द ही भारत का निर्वाचन आयोग चुनाव की तिथि घोषित कर देगा। मतदान प्रतिशत बढ़ता है या घटना है यह भी समय के गर्भ में छिपा हुआ हैं लेकिन अब ऐसी व्यवस्था एवं तकनीक विकसित करने का भी समय आ गया है जिससे अपने गांव, शहर से दूर रहने वाले वहां जाये बगैर मतदान कर सकें। ऐसे लोगों की संख्या भारत देश में करोड़ो में है। रोजी रोटी के लिये अपने गांव शहर से दूर जाकर जीवन यापन करने वाले सब लोगों के लिये यह संभव नहीं है कि वे मतदान करने अपने घर गांव लौट सके। यदि सेना और अद्र्वसैनिक बलों के जवानों के साथ-साथ चुनाव ड्यूटी में शामिल अद्र्वसैनिक बल एवं अन्य कर्मचारियों के लिये वोट देने की व्यवस्था हो सकती है तो अन्य लोगों के लिये क्यों नहीं। इस बार ऐसी किसी व्यवस्था के लिये नवनिर्माण के लिये निर्वाचन आयोग के साथ सरकार को भी सक्रिय होना समय की मांग है। 140 करोड़ की जनसंख्या वाले भारत देश में मतदाताओं की संख्या 97 करोड़ है। चुनाव में बेहद कम दिन बचे है ऐसे में मतदान प्रतिशत को बढ़ाना पहाड़ चढ़ने के समान है। जिला निर्वाचन अधिकारी देहरादून के द्वारा मतदान प्रतिशत को बढ़ाने के लिये काफी मेहनत की जा रही है, इसके लिये जनजागरूकता अभियान भी चलाये जा रहे है। लेकिन बात वहीं आ जाती है कि जब तक रोजी रोटी की तलाश में अपने गांव शहर से दूर रहने वाले व्यक्ति के लिये मतदान की व्यवस्था नहीं हो जाती तब तक किसी भी लक्ष्य को पूरा नहीं किया जा सकता।




