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कैड़ा के बाद भाजपा विधायक दुर्गेश्वर लाल का वन मंत्री पर गंभीर आरोप : गरीमा मेहरा दसौनी

दसोनी ने कहा कि यह वन मंत्री का सौभाग्य ही था कि न्यायालय ने उस प्रकरण का संज्ञान नहीं लिया वरना मंत्री के लिए बड़ी मुसीबत खड़ी हो सकती थी।

देहरादून‌।पुरोला से भाजपा विधायक दुर्गेश्वर लाल के द्वारा वन मंत्री के घर के बाहर धरना और वन मंत्री पर लगाए गए गंभीर आरोपो को उत्तराखंड कांग्रेस की मुख्य प्रवक्ता गरिमा मेहरा दसौनी ने गंभीर प्रकरण बताया है ।दसौनी ने कहा कि अभी चार  दिन भी नहीं बीते हैं जब भीमताल से भाजपा विधायक राम सिंह कैड़ा के साथ दूरभाष पर वार्ता करते हुए वन मंत्री उनियाल  पर यह आरोप लगे कि उन्होंने उच्च न्यायालय के संबंध में बहुत ही आपत्तिजनक और अभद्र टिप्पणियां की थी ।

दसोनी ने कहा कि यह वन मंत्री का सौभाग्य ही था कि न्यायालय ने उस प्रकरण का संज्ञान नहीं लिया वरना मंत्री के लिए बड़ी मुसीबत खड़ी हो सकती थी। दसौनी ने यह भी कहा कि यदि उस प्रकरण में ही मंत्री पर कार्यवाही हो गई होती तो आज मंत्री के हौसले इतने बुलंद नहीं होते कि वह एक चुने हुए प्रति निधि का अपमान कर पाते।

दसौनी ने कहा कि  वन मंत्री अपनी आदतों से बाज आते हुए दिखाई नहीं  दे रहे।

अब पुरोला से भाजपा विधायक दुर्गेश्वर लाल ने वन मंत्री पर मनमानी करने के और  जाति सूचक शब्द कहने जैसे गंभीर आरोप लगाए हैं जिनकी जांच होनी चाहिए। दसोनी ने कहा कि भारतीय जनता पार्टी के मंत्री सत्ता के अहंकार में सनक गए हैं ,फिर चाहे प्रेमचंद अग्रवाल हों या सुबोध उनियाल, प्रदेश के मुखिया अपने मंत्रिमंडल के सदस्यों को काबू में रख पाने में असमर्थ साबित हो रहे हैं और आज उत्तराखंड अपने मंत्रियों के क्रियाकलापों और बयानों की वजह से शर्मसार हो रहा है ।

दसौनी ने कहा कि इससे पहले भी बेरोजगार युवाओं का एक प्रतिनिधिमंडल जब मंत्री उनियाल से मिलने के लिए गया तो त्रिवेंद्र सरकार में उनियाल बेरोजगार युवाओं से बहुत ही अभद्रता से पेश आए जिसका वीडियो सोशल मीडिया पर बहुत वायरल हुआ।

दसोनी ने कहा कि जनप्रतिनिधियों का आचरण अनुसरणीय और अनुकरणीय होना चाहिए ताकि युवा  पीढ़ी उनसे प्रभावित होकर समाज को बेहतर बनाने में योगदान दे सके । लेकिन उत्तराखंड में भाजपा के मंत्री गुंडागर्दी और बढ़बोलेपन के लिए ज्यादा चर्चा में आ रहे हैं और विकासकारी और जनहित की योजनाओं के लिए कम।

दसौनी ने कहा की क्योंकि मंत्री सुबोध मुख्यमंत्री के मंत्रिमंडल के सदस्य हैं ऐसे में स्वयं धामी जी को व्यक्तिगत रूप से हस्तक्षेप कर इस प्रकरण पर विराम लगाना चाहिए ताकि उत्तराखंड की और किरकिरी ना हो।

दसौनी ने कहा कि इस बात की भी जांच होनी चाहिए की वन मंत्री ने एक चुने हुए जनप्रतिनिधि दुर्गेश्वर लाल के साथ जो अभद्रता की है उसके लिए उन्हें सार्वजनिक रूप से माफी भी मांगनी चाहिए। दसौनी ने कहा कि ऐसा प्रतीत होता है कि जब से सुबोध उनियाल से महत्वपूर्ण विभाग  वापस ले लिए गए हैं तब से वह अवसाद ग्रस्त हैं और उनका अपनी जुबान पर कोई काबू नहीं रह गया है।

 

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