खरीफ बुवाई, मानसून, सूखा प्रबंधन, उर्वरक उपलब्धता सहित खाद्यान्न भंडारण की स्थिति पर केन्द्रीय कृषि मंत्री ने की विस्तृत समीक्षात्मक बैठक
जिलेवार कॉन्टिंजेंसी प्लान के प्रभावी क्रियान्वयन से एल नीनो की चुनौतियों से निपटेंगे- केन्द्रीय कृषि मंत्री

नई दिल्ली ,3 .जुलाई
केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण व ग्रामीण विकास मंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान की अध्यक्षता में आज नई दिल्ली स्थित कृषि भवन में खरीफ फसलों की बुवाई से संबंधित वर्तमान स्थिति, मानसून और एल नीनो के प्रभाव का आकलन, वर्षा की कमी से प्रभावित जिलों की संख्या, कॉन्टिंजेंसी प्लान के क्रियान्वयन, उर्वरकों की उपलब्धता तथा खाद्यान्नों के भंडारण की वर्तमान स्थिति की विस्तृत समीक्षा की गई।
बैठक के दौरान केंद्रीय कृषि मंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने अधिकारियों को एल नीनो के संभावित प्रभावों पर सतत एवं कड़ी निगरानी रखने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि देशभर में वर्षा की कमी की आशंका वाले 262 संवेदनशील जिलों की पहचान की गई है। इनमें से 52 जिलों में पिछले कुछ दिनों में वर्षा हुई है जो सकारात्मक संकेत है जबकि 210 जिले अब भी वर्षा की कमी का सामना कर रहे हैं। इनमें से 8 जिलों में अब तक नगण्य या बिल्कुल वर्षा नहीं हुई है।
बैठक में बताया गया कि 2 जुलाई से पश्चिमी विक्षोभ के सक्रिय होने की संभावना है तथा आगामी 2-3 दिनों में मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश, जम्मू-कश्मीर, लद्दाख और दक्षिण-पूर्वी राजस्थान के कुछ हिस्सों में मानसून की प्रगति होने की संभावना है। हालांकि, समग्र रूप से इस वर्ष वर्षा सामान्य से कम रहने का अनुमान व्यक्त किया गया है।
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि उत्तर गुजरात के कुछ क्षेत्रों में वर्षा की कमी देखी गई है। महाराष्ट्र में पिछले कुछ दिनों में वर्षा हुई है, लेकिन वहां जलाशयों में जलस्तर घट रहा है। उन्होंने कहा कि यदि वर्षा में लंबा अंतराल आता है तो स्थिति चुनौतीपूर्ण हो सकती है।
श्री चौहान ने निर्देश दिए कि प्रत्येक जिले के लिए तैयार किए गए कॉन्टिंजेंसी प्लान को प्रभावी ढंग से लागू किया जाए। उन्होंने कहा कि वर्षा की कमी से अधिक प्रभावित राज्यों के मुख्यमंत्रियों के साथ बैठक आयोजित कर कॉन्टिंजेंसी प्लान के क्रियान्वयन और अब तक की गई कार्रवाई की समीक्षा की जाएगी। केंद्रीय मंत्री ने कहा कि राज्यों के मुख्यमंत्री के नेतृत्व में संभावित मानसूनी चुनौतियों का प्रभावी ढंग से सामना किया जाएगा। उन्होंने प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना (पीएमएफबीवाई) के प्रभावी क्रियान्वयन तथा कृषि ऋण कवरेज बढ़ाने पर विशेष बल दिया।
बैठक में बताया गया कि देश के 166 प्रमुख जलाशयों में जल भंडारण पिछले वर्ष की तुलना में कम हैं जबकि अधिकांश क्षेत्रों में भूजल की स्थिति स्थिर बनी हुई है। फसल मौसम निगरानी समूह (सीडब्ल्यूडब्ल्यूजी) की साप्ताहिक बैठकों के माध्यम से सूखे की स्थिति की लगातार निगरानी की जा रही है तथा आवश्यक समन्वय स्थापित किया जा रहा है। 15 राज्यों ने इस उद्देश्य के लिए नोडल अधिकारियों की नियुक्ति भी कर दी है।
बैठक के दौरान भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर) और केंद्रीय शुष्क भूमि कृषि अनुसंधान संस्थान (क्रिडा) द्वारा किए जा रहे प्रयासों की भी समीक्षा की गई। बताया गया कि राज्यों के साथ जिला स्तर पर आपातकालीन उपायों की समीक्षा के लिए बैठकें आयोजित की जा चुकी हैं तथा कृषि विज्ञान केंद्रों (केवीके) को आवश्यक आपातकालीन उपायों के क्रियान्वयन के लिए तैयार रहने के निर्देश दिए गए हैं।
बैठक में दलहन, तिलहन और कपास मिशन की प्रगति की समीक्षा करते हुए इन क्षेत्रों में प्रयासों को और तेज करने के निर्देश दिए गए। इसके अतिरिक्त, बागवानी फसलों की बुवाई की स्थिति, साप्ताहिक औसत मंडी मूल्य, दलहन, तिलहन, गेहूं एवं चावल के बफर स्टॉक की स्थिति की भी समीक्षा की गई।
अधिकारियों ने बताया कि राष्ट्रीय बीज निगम के पास पर्याप्त मात्रा में बीज उपलब्ध हैं। उर्वरकों की उपलब्धता के बारे में बताया गया कि अप्रैल से जून 2026 के बीच 176.13 एलएमटी की आवश्यकता के विरुद्ध 286.37 एलएमटी उर्वरक की उपलब्धता मौजूद रही। केन्द्रीय कृषि मंत्री ने इस पर संतोष व्यक्त किया तथा उन्होंने जनजातीय क्षेत्रों में उर्वरकों की उपलब्धता में किसी प्रकार की कोई कमी न हो इसे सुनिश्चित करने के खास निर्देश दिए।
श्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि वर्ष 2025-26 भारतीय कृषि के लिए अत्यंत सफल वर्ष रहा है। हमें इसी अनुरूप चुनौतियों के बावजूद कृषि और किसान कल्याण की दिशा में सतत प्रयास करते रहना है। उन्होंने निर्देश दिए कि कॉन्टिंजेंसी प्लान के क्रियान्वयन की सतत निगरानी की जाए तथा प्रभावित जिलों में किसान क्रेडिट कार्ड (केसीसी) और प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के कवरेज को बढ़ाने के लिए और तेज प्रयास किए जाएं।




