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मानवीय संवेदनशीलता से बची 10 माह की मासूम की जिंदगी

उच्च हिमालयी क्षेत्र में 5 वर्ष से कम आयु के बच्चों को यात्रा में लाने से बचें श्रद्धालु

देहरादून। श्री केदारनाथ धाम यात्रा के दौरान जिला प्रशासन की तत्परता, संवेदनशीलता और मानवीय दृष्टिकोण का एक अत्यंत प्रेरणादायक उदाहरण सामने आया है, जहां समय रहते की गई कार्रवाई से एक 10 माह की मासूम बच्ची की जान बचाई जा सकी। वाराणसी निवासी श्रद्धालु विवेक पाण्डेय की पुत्री विलीका पाण्डेय, आयु 10 माह कल यात्रा से वापसी के दौरान स्वस्थ बिगड़ने से गंभीर स्थिति में पहुंच गई। जानकारी के अनुसार, बच्ची को उसके माता पिता द्वारा कंडी के माध्यम से सामान के साथ बैठाकर नीचे लाया जा रहा था, जबकि माता-पिता एक अन्य बच्चे के साथ घोड़े पर सवार होकर आगे निकल गए। इसी दौरान अचानक मौसम बदलने और हल्की बारिश व ठंड के बीच बच्ची लगातार रोती रही। भैरव ग्लेशियर के समीप तैनात जिला प्रशासन की टीमों के जवानों एवं जागरूक यात्रियों ने बच्ची की गंभीर स्थिति को भांपते हुए तत्काल कंडी को रुकवाया। बच्ची को तत्काल भैरव ग्लेशियर स्थित अस्पताल पहुंचाया गया, जहां चिकित्सकों द्वारा जांच करने पर पाया कि बच्ची हाइपोथर्मिया, ऑक्सीजन की कमी और भूख से जूझ रही थी। ऐसी विषम परिस्थितियों में डॉ. नरेश एवं उनकी टीम ने अद्भुत संवेदनशीलता और तत्परता का परिचय देते हुए बच्ची को त्वरित आवश्यक उपचार उपलब्ध कराया। ऑक्सीजन सपोर्ट, आवश्यक चिकित्सा देखभाल एवं फीडिंग के माध्यम से बच्ची को सुरक्षित अवस्था में लाया गया। यह पूरी कार्यवाही प्रशासन की त्वरित प्रतिक्रिया और मानवता के प्रति समर्पण को दर्शाती है। पुलिस एवं प्रशासन ने तत्परता दिखाते हुए बच्ची के माता-पिता को तत्काल मौके पर बुलवाया और बच्ची को सुरक्षित उनके सुपुर्द किया। साथ ही, उन्हें भविष्य में बच्चों की सुरक्षा के प्रति अधिक सतर्क रहने की कड़ी हिदायत भी दी गई।
मुख्य चिकित्सा अधिकारी रुद्रप्रयाग डॉ. रामप्रकाश ने इस घटना को गंभीर चेतावनी के रूप में लेते हुए सभी श्रद्धालुओं से अपील की है कि श्री केदारनाथ धाम जैसे उच्च हिमालयी क्षेत्रों में मौसम अत्यंत कठोर एवं अनिश्चित होता है, जो विशेष रूप से छोटे बच्चों के लिए खतरनाक साबित हो सकता है। उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा कि 5 वर्ष से कम आयु के बच्चों को इस यात्रा पर लाने से बचना चाहिए। जिला प्रशासन ने पुनः यह संदेश दिया है कि यात्रा के दौरान सुरक्षा, सतर्कता और जिम्मेदारी का पालन अत्यंत आवश्यक है। श्रद्धालु मौसम की परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए यात्रा करें तथा बच्चों और बुजुर्गों की विशेष देखभाल सुनिश्चित करें, ताकि यात्रा सुरक्षित और सुखद बनी रहे।

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