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नरेन्द्र संगीत सप्ताह का आयोजन

श्रीनगर (गढ़वाल ), 17 अप्रैल। हेमवती नंदन बहुगुणा गढ़वाल केन्द्रीय विश्वविद्यालय के लोक कला एवं संस्कृति निष्पादन केन्द्र द्वारा उत्तराखण्ड के गीत संगीत में लोकगायक नरेन्द्र सिंह नेगी के योगदान को देखते हुए नरेन्द्र संगीत सप्ताह का आयोजन किया गया है। इस आयोजन में देशभर से 80 से अधिक प्रतिभागियों ने गायन के लिए अपनी प्रविष्ठियां भेजी हैं जो इस मंच पर अपना गायन करेंगे। नरेन्द्र सिंह नेगी के गीत संगीत की परंपरा जो उत्तराखण्ड की लोक-संस्कृति का प्रतिनिधित्व करती है उसी की प्रस्तुति नरेन्द्र संगीत सप्ताह में की जा रही है।यह पहला अवसर है जब 52 साल से गढ़वाली गीत संगीत की दुनिया में शिखर पर पहुंचे कलाकार नरेन्द्र सिंह नेगी की रचनाधर्मिता और गायन पर कोई ऐसा आयोजन हो रहा हो। इस समारोह का शुभारंभ करते हुए विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर श्रीप्रकाश सिंह ने कहा कि यह बहुत की सकारात्मक आयोजन है जो लोक-संस्कृति के उन्नयन में मील का पत्थर साबित होगा। उत्तराखण्ड में लोकगायक नरेन्द्र सिंह नेगी का महत्वपूर्ण योगदान है और नई पीढ़ी उनसे बहुत प्रभावित है। स्वर के संस्कारित भाव को स्थापित करने वाले कलाकार के रूप में नरेन्द्र सिंह नेगी देश और दुनिया में पहचाने जाते हैं। कुलपति ने लोक कला एवं संस्कृति निष्पादन केन्द्र के इस आयोजन की सराहना करते हुए कहा कि यह केन्द्र अपनी ऐसी छवि स्थापित करे जैसा संगीत के क्षेत्र में प्रयाग संगीत समिति है जहां से संगीत का हर साधक प्रमाणित होना चाहता है।

मेरी कामना है इस केन्द्र के प्रति भी कलाकारों में ऐसा सम्मान हो और इसके लिए काम करने आवश्यकता है। कुलपति ने कहा कि यह केन्द्र उत्तराखण्ड के ढोल, लोक-संस्कृति की परंपराओं, अपना अवदान करने वाले कलावतों की कलाओं को भावी पीढ़ी तक पहुंचाने और संवेदनशील ढंग से संस्कृति को आगे बढ़ाने के क्षेत्र में कार्य करेगा। डॉ श्रीप्रकाश सिंह ने कहा कि हमने विश्वविद्यालय में गढ़वाली भाषा संस्कृति के संरक्षण केन्द्र की स्थापना की है इस केन्द्र के माध्यम से भाषा की श्रीवृद्धि के लिए कार्य किया जाएगा। इस कार्यक्रम में प्रतिभाग करने पहुंचे गढ़गौरव नरेन्द्र सिंह नेगी ने हेमवती नंदन बहुगुणा गढ़वाल केन्द्रीय विश्वविद्यालय का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि विश्वविद्यालय ने मेरे कार्य को इतनी गंभीरता से लिया इसे मैं अपना सौभाग्य समझता हूॅं। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय में ऐसे कार्यक्रम युवाओं के लिए अवसर पैदा करेंगे।नेगी ने ठंडो रे ठंडो मेरा पाड़ै कि हवा ठंडी पाणी ठंडो गीत गाकर श्रोताओं को मंत्रमुग्ध किया। इस अवसर पर केन्द्र के संस्थापक डॉ डी.आर. पुरोहित ने कहा कि इस तरह की परंपरा बंगाल में रवीन्द्र संगीत के नाम से जानी जाती है।

उत्तराखण्ड में इस परंपरा के योग्य कलाकार हैं नरेन्द्र सिंह नेगी। विश्वविद्यालय का यह महत्वपूर्ण आयोजन है और इस कार्यक्रम को आयोजित कर विश्वविद्यालय ने एक नई परंपरा शुरू की है जो सराहनीय है। नरेन्द्र संगीत सप्ताह के पहले दिन सतपुली से आई हेमलता बिष्ट, अम्बिका किमोठी (ऋषिकेश), डॉ.सर्वेश सुयाल(देहरादून),जैंतोली चौंदकोट से आई सूमा रावत,लव मैठाणी, अंकित भट्ट, शकुन्तला नेगी,प्राची कण्डवाल और केंद्र के सहायक निदेशक महेन्द्र सिंह पंवार ने अपने गीतों की प्रस्तुति दी।इस कार्यक्रम में हर आयु वर्ग और क्षेत्र के कलाकार अपनी प्रस्तुति देने पहुंच रहे हैं यहां ऐसे कलाकार भी आ रहे हैं जिन्हें पहली बार मंच मिल रहा है।ऐसे कलाकार भी पहुंच रहे हैं जिन्होंने आज तक किसी मंच में प्रस्तुति नही दी है।उनके लिए यह मंच केन्द्र की उपलब्धि है। कार्यक्रम का संचालन उपनिदेशक डॉ संजय पाण्डेय और निदेशक गणेश खुगशाल गणी ने संयुक्त रूप से किया। कार्यक्रम में विशिष्ट अतिथि बिपिन बलूनी, कुलसचिव प्रोफेसर वाईएस रैवानी, अधिष्ठाता छात्र कल्याण प्रोफेसर ओ पी गुसाईं,डीन नियुक्ति एवं पदोन्नति प्रो. मोहनसिंह पंवार सहित बड़ी संख्या में संस्कृतिकर्मी उपस्थित रहे।

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