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जिनेन्द्र भगवान का अभिषेक कर की गयी शांतिधारा

गणधर स्वयं तरेशठ रिद्धी के धारी होते है परन्तु फिर भी अपने ऊपर तीर्थकर भगवान को रखते है।

देहरादून, 13 सितंबर। परम पूज्य संस्कार प्रणेता ज्ञानयोगी जीवन आशा हॉस्पिटल प्रेरणा स्तोत्र उत्तराखंड के राजकीय अतिथि आचार्य श्री 108 सौरभ सागर जी महामुनिराज के मंगल सानिध्य में आज प्रातः 6.15 बजे से जिनेन्द्र भगवान का अभिषेक कर शांतिधारा की गयी। इसके पश्चात संगीतमय कल्याण मंदिर विधान का आयोजन किया गया। विधान मे उपस्थित भक्तो ने बड़े भक्ति भाव के साथ 23वे तीर्थंकर चिंतामणि भगवान पार्श्वनाथ की आराधना की। आज के विधान के पुण्यार्जक जिनवाणी जाग्रति मंच रही। पूज्य आचार्य श्री के पास बाहर से पधारे गुरुभक्तो का पुष्प वर्षायोग समिति द्वारा स्वागत अभिनन्दन किया गया।
भगवान पार्श्वनाथ की भक्ति आराधना करते हुए पूज्य आचार्य श्री ने कहा कि जिन्दगी में किसी ना किसी को अपने ऊपर बैठा कर रखना चाहिए। कितने भी बड़े हो जाओ अगर एक आपके ऊपर बैठा है, तो तुम्हे जिस दिन अहसास रहेगा कि ऊपर कोई है तो हमेशा सावधान रहोगे और साहसी रहोगे। अगर उसके प्रति सम्मान का भाव है तो सावधान रहोगे। और अगर जीवन में कभी कोई कठिनाई या परेशानी आयेगी तो आपको साहस रहेगा कि कोई मेरे ऊपर है, तो कोई चिंता वाली बात नहीं है। गणधर स्वयं तरेशठ रिद्धी के धारी होते है परन्तु फिर भी अपने ऊपर तीर्थकर भगवान को रखते है।

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