बह गए मालन नदी पर साल भर पहले बने करोड़ों के तटबंध
मालन नदी के किनारे पूर्व कैबिनेट मंत्री ने दिखाया विकास का फर्क

कोटद्वार। मालन नदी में बाढ़ और तेज बहाव के कारण हाल ही में बने तटबंधों एवं प्रोटेक्शन वर्क के क्षतिग्रस्त होकर बह जाने की सूचना के बाद पूर्व कैबिनेट मंत्री सुरेन्द्र सिंह नेगी ने क्षेत्र का स्थलीय निरीक्षण किया। मौके पर पहुंचकर उन्होंने नदी के दोनों हिस्सों में बने पुराने और नए प्रोटेक्शन वर्क की स्थिति का जायजा लिया और निर्माण कार्यों की गुणवत्ता का फर्क मौके पर ही सामने रखा। निरीक्षण के दौरान सबसे चौंकाने वाली तस्वीर यह सामने आई कि वर्षों पहले कराया गया प्रोटेक्शन वर्क आज भी मजबूती से खड़ा है, जबकि हाल के वर्षों में करोड़ों रुपये खर्च कर बनाए गए तटबंध नदी के तेज बहाव का सामना नहीं कर पाए और कई स्थानों पर क्षतिग्रस्त होकर बह गए। नेगी जी ने मौके पर बताया कि उनके कार्यकाल के दौरान वर्ष 2013-14 में स्थानीय ठेकेदारों के माध्यम से मालन नदी क्षेत्र में लगभग डेढ़ किलोमीटर के आसपास सुरक्षा एवं प्रोटेक्शन वर्क कराया गया था। इसका उद्देश्य नदी के बहाव से होने वाले भूमि कटाव को रोकना और आसपास की कृषि भूमि को सुरक्षित रखना था। आज इतने वर्ष बीत जाने के बावजूद यह प्रोटेक्शन वर्क मजबूती से खड़ा है। इसके चलते आसपास की कृषि भूमि सुरक्षित रही और खेतों में फसल भी सुरक्षित बनी हुई है। जिस क्षेत्र को नदी के कटाव से बचाने के लिए यह कार्य कराया गया था, वहां समय के साथ पेड़-पौधे एवं हरित क्षेत्र भी विकसित हुआ है, जिससे भूमि संरक्षण में मदद मिली है। नेगी जी ने कहा कि उस समय निर्माण कार्य कराते हुए केवल तत्कालीन जरूरत को नहीं, बल्कि भविष्य में नदी के संभावित कटाव और आसपास की भूमि की सुरक्षा को ध्यान में रखकर गुणवत्तापूर्ण निर्माण कराया गया था। मालन नदी के दूसरे हिस्से में हाल के वर्षों में बनाए गए तटबंधों और प्रोटेक्शन वर्क की स्थिति इसके बिल्कुल विपरीत दिखाई दी। करोड़ों रुपये खर्च किए जाने के बावजूद कई स्थानों पर निर्माण कार्य नदी के तेज बहाव में क्षतिग्रस्त होकर बह चुका है। इससे आसपास की कृषि भूमि, खेतों और फसलों को भी नुकसान पहुंचा है। ऐसे में सवाल उठना स्वाभाविक है कि जब वर्षों पहले कराया गया कार्य आज भी मजबूती से खड़ा है, तो करोड़ों रुपये खर्च कर बनाए गए नए तटबंध इतने कम समय में नदी के बहाव में कैसे बह गए? पूर्व कैबिनेट मंत्री सुरेन्द्र सिंह नेगी ने कहा कि निर्माण कार्यों में स्थानीय ठेकेदारों की क्षमता और अनुभव को नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए। यदि स्थानीय स्तर पर उपलब्ध ठेकेदार गुणवत्तापूर्ण कार्य कर सकते हैं और वर्षों बाद भी उनके द्वारा बनाए गए प्रोटेक्शन वर्क मजबूती से खड़े हैं, तो फिर ऐसे कार्यों में स्थानीय ठेकेदारों को अवसर क्यों नहीं दिया जा रहा है, यह भी विचारणीय विषय है। *उन्होंने कहा कि भारी-भरकम बाहरी ठेकेदारों को करोड़ों रुपये के कार्य देने मात्र से विकास सुनिश्चित नहीं होता। विकास की असली पहचान काम की गुणवत्ता और उसकी टिकाऊपन से होती है। जनता के करोड़ों रुपये की गुणवत्ता का हिसाब कौन देगा? मालन नदी में सामने आए पुराने और नए निर्माण कार्यों के इस अंतर ने सरकारी निर्माण कार्यों की गुणवत्ता, ठेकेदारों के चयन, तकनीकी निगरानी और करोड़ों रुपये के खर्च की उपयोगिता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। एक ओर 14-15 वर्ष पहले स्थानीय ठेकेदारों के माध्यम से कराया गया प्रोटेक्शन वर्क आज भी नदी के सामने मजबूती से खड़ा है और कृषि भूमि की रक्षा कर रहा है, वहीं दूसरी ओर करोड़ों रुपये खर्च कर बनाए गए नए तटबंध नदी के बहाव में बह गए। नेगी जी ने कहा कि जनता के टैक्स का पैसा जनता की सुरक्षा और सुविधा के लिए खर्च होता है। ऐसे में प्रत्येक निर्माण कार्य में गुणवत्ता और जवाबदेही सुनिश्चित करना सरकार और संबंधित विभाग की जिम्मेदारी है। मालन नदी के किनारे दिखाई दे रहा यह अंतर अब केवल दो तटबंधों का अंतर नहीं, बल्कि निर्माण कार्यों की गुणवत्ता, दूरदृष्टि और सरकारी धन के सही इस्तेमाल पर बड़ा सवाल बनकर सामने आया है। मौके पर खड़े 14-15 साल पुराने तटबंध और नदी में बह चुके नए निर्माण खुद विकास के दो अलग-अलग दौर की कहानी बयां कर रहे हैं। फर्क साफ है।




