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‘भुली‘ कार्यक्रम का औपचारिक शुभारंभ

कहा सरकार का निरंतर प्रयास है कि रोजगार के अवसरों को बढ़ाया जाए।

देहरादून, 14 जुलाई। उत्तराखण्ड, राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के अंतर्गत ग्रामीण उद्यम इन्क्यूबेशन कार्यक्रम शुरू करने वाला उत्तर भारत का पहला राज्य बन गया है। देहरादून स्थित सिविल सर्विसेज इंस्टीट्यूट (सीएसआई) में आयोजित हुए कार्यक्रम में ‘‘Business & Handholidng Unit for Livelihood inqubation यानी ‘भुली‘ कार्यक्रम का औपचारिक शुभारंभ, एमआईएस पोर्टल तथा बुकलेट का विमोचन किया गया। इस दौरान विभिन्न महिला एसएचजी उद्यमियों द्वारा अपने अनुभव साझा किए। महिला उद्यमियों द्वारा लगाए गए स्थानीय उत्पादों के स्टॉल्स की अतिथियों ने सराहना की। कार्यक्रम में मा0 ग्राम्य विकास मंत्री तथा सचिव ग्राम्य विकास विभाग द्वारा विभिन्न जनपदों से आई एसएचजी उद्यमियों को सम्मानित किया गया।
कार्यक्रम का शुभारंभ मुख्य अतिथि ग्राम्य विकास मंत्री उत्तराखण्ड सरकार श्री भरत सिंह चैधरी द्वारा दीप प्रज्जवलन कर किया गया। उन्होंने कहा कि ‘भुली’ कार्यक्रम उत्तराखण्ड की मातृशक्ति के सपनों को पंख देने का अभियान है। आईआईएम काशीपुर के सहयोग से अब हमारी बहनें रोजगार ढूंढने वाली से रोजगार देने वाली बनेंगी और होम-ग्रोन महिला व्यवसायों को राष्ट्रीय पहचान मिलेगी। उन्होने एसएचजी सदस्यों से बढ़चढ़ इस कार्यक्रम का लाभ लेने की अपील की। कहा कि इसे 150 उद्यमियों तक ही सीमित नहीं रखा जाएगा इसे राज्य स्तर पर बढ़ाने हेतु कार्ययोजना तैयार की जाएगी। उन्होने कहा कि स्कूली बच्चों तथा पुलिस कर्मियों के लिए ड्रेसों को निर्माण का कार्य स्वंय सहायता समूहोें के माध्यम से कराने के लिए राज्य सरकार की ओर से पहल रही है। पशुपालन, डेयरी क्षेत्र के साथ ही अन्य क्षेत्रों में भी रोजगार की अपार संभावनाएं है इस हेतु भी विभाग की ओर से विशेष प्रयास किए जा रहे हैं। इस आयोजन के लिए उन्होने उत्तराखण्ड राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन तथा आईआईएम काशीपुर फिड टीम को लिए बधाई दी।
इससे पूर्व मुख्य कार्यकारी अधिकारी, उत्तराखण्ड राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन सुश्री झरना कमठान द्वारा अतिथियों का स्वागत करते हुए कार्यक्रम की रूपरेखा के बारे में अवगत कराया। उन्होंने कहा कि यह अभिनव कार्यक्रम उत्तराखण्ड राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन (यूएसआरएलएम) द्वारा आईआईएम काशीपुर फिड के तकनीकी सहयोग से आयोजित किया जा रहा है। इसका उद्देश्य स्वयं सहायता समूहों की महिला उद्यमियों के पारंपरिक व्यवसायों को मजबूत व्यावसायिक ढांचा प्रदान करना है। इच्छुक महिला उद्यमी आईआईएम काशीपुर फिड की वेबसाइट के माध्यम से सीधे आवेदन कर सकती हैं। कहा कि योजना में कुल 150 उद्यमियों का चयन व्यक्तिगत, समूह और बड़े उद्यम श्रेणियों में किया जाएगा। प्रत्येक वर्ग के 6 उद्यमियों (कुल 18) को अधिकतम प्रति उद्यम 15 लाख रुपये का अनुदान दिया जाएगा, जबकि शेष 132 उद्यमियों को औसत 4 लाख रुपये तक का ब्याज मुक्त लोन की सुविधा प्रदान की जाएगी। अन्य सभी इच्छुक आवेदकों को कौशल प्रशिक्षण और मार्गदर्शन दिया जाएगा। 18 माह के इस इन्क्यूबेशन का लक्ष्य उद्यमियों का लाभ न्यूनतम 15 से 20 प्रतिशत तक बढ़ाना है। समारोह में उपस्थित ग्राम्य विकास विभाग के सचिव श्री धीराज सिंह गब्र्याल ने कहा कि यह तीन वर्षीय महत्वाकांक्षी योजना हमारे स्वयं सहायता समूहों के पारंपरिक कौशल को कॉपोरेट और व्यावसायिक ढांचे में बदलने का काम करेगी। कहा सरकार का निरंतर प्रयास है कि रोजगार के अवसरों को बढ़ाया जाए। उन्होंने ग्रामीण क्षेत्रों में समेकित कृषि आधारित मॉडल को अपनाने की अपील की। आईआईएम काशीपुर के निदेशक प्रो0 नीरज द्विवेदी ने इस दौरान कहा कि भुली परियोजना उत्तराखण्ड की महिला उद्यमियों को आगे बढ़ाने का एक शानदार मंच है इसके लिए उन्होने ग्राम्य विकास विभाग का आभार व्यक्त किया। उन्होने कहा कि प्रदेश में समूहों के माध्यम से, उद्यम चला रही महिलाओं को एक सफल उद्यमी बनाने के लिए यह एक संयुक्त साझा प्रयास किया रहा है। उन्होने उम्मीद जताई कि समूह सदस्य इस योजना का लाभ उठाएंगे। आईआईएम का हमेशा से यह प्रयास रहा है कि ग्रामीण स्तर पर छोटे उद्यमियों को भी प्रबंधन की बारीकियों से लाभ प्रदान किया जाए। अपर मुख्य कार्यकारी अधिकारी श्री प्रदीप कुमार पाण्डेय ने सभी अतिथियों का आभार व्यक्त करते हुए समूह उद्यमियों से अधिक से अधिक इस योजना का लाभ लेने की अपील की। कहा कि योजना के तहत समूह सदस्यों को लखपति बनाने हेतु निरंतर क्षमता विकास किया जा रहा है, भुली कार्यक्रम भी इन्हीं प्रयासों का एक हिस्सा है। कार्यक्रम में आयुक्त ग्राम्य विकास विभाग अनुराधा पाल, फिड कार्यक्रम समन्वयक प्रो. सफल बत्रा तथा यूएसआरएलएम के समस्त स्टाॅफ तथा समस्त 13 जनपदों की सैकड़ों एसएचजी महिला उद्यमी उपस्थित रहीं।

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