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भारतीय रेल ने एसईसीआर में रायपुर डिवीजन के 13 स्टेशनों के लिए 226 करोड़ रुपये की इलेक्ट्रॉनिक इंटरलॉकिंग परियोजना को मंजूरी दी

विश्वसनीयता और सिग्नलिंग दक्षता मजबूत होगी

नई दिल्ली 1,जून
सिग्नलिंग इन्फ्रास्ट्रक्चर के आधुनिकीकरण और परिचालन सुरक्षा को बढ़ाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए, भारतीय रेल ने दक्षिण पूर्व मध्य रेल (एसईसीआर) के रायपुर डिवीजन के दुर्ग-तारोकी खंड के 13 स्टेशनों पर 226 करोड़ रुपये की लागत से इलेक्ट्रॉनिक इंटरलॉकिंग (ईआई) प्रणाली की स्थापना को मंजूरी दे दी है।

इस परियोजना में 13 स्टेशनों पर मौजूदा पैनल इंटरलॉकिंग (पीआई) प्रणाली को इलेक्ट्रॉनिक इंटरलॉकिंग (ईआई) प्रणाली से बदलना शामिल है, जिससे सुरक्षित, अधिक विश्वसनीय और प्रौद्योगिकी-आधारित ट्रेन परिचालन संभव हो सकेगा।

सिग्नलिंग इन्फ्रास्ट्रक्चर का आधुनिकीकरण

स्वीकृत परियोजना में रायपुर डिवीजन के दुर्ग-तारोकी खंड के निम्नलिखित स्टेशनों पर इलेक्ट्रॉनिक इंटरलॉकिंग प्रणाली की स्थापना शामिल है:

मारौडा (एमएक्सए)
रिसमा (आरएसए)
गुंडार्देही (जीडीजेड)
लाटाबोर (एलबीओ)
बलोद (बीएक्सए)
कुसुमकासा (केवाईएस)
दल्ली राजहरा (डीआरजेड)
गुडम (जीयूडीएम)
भानुप्रतापुर (बीपीटीपी)
केवटी (केईटीआई)
अंतागढ़ (एएजीएच)
तारोकी (टीडीओके)
रायपुर स्टोर डिपो (आरएसडी)
पैनल इंटरलॉकिंग से इलेक्ट्रॉनिक इंटरलॉकिंग प्रणाली में परिवर्तन से इस महत्वपूर्ण खंड पर सिग्नलिंग इन्फ्रास्ट्रक्चर का काफी आधुनिकीकरण होगा, जिससे परिचालन में अनुकूलन और सिस्टम की विश्वसनीयता में सुधार होगा।

अधिक सुरक्षित, तेज और अधिक विश्वसनीय ट्रेन परिचालन

इलेक्ट्रॉनिक इंटरलॉकिंग प्रणाली एक अत्याधुनिक सिग्नलिंग तकनीक है जो उन्नत सुरक्षा सुविधाओं को शामिल करते हुए रूट सेटिंग और सिग्नलिंग कार्यों को स्वचालित बनाती है। उन्नत प्रणाली परिचालन दक्षता में सुधार करेगी, सिग्नलिंग विफलताओं की संभावना को कम करेगी और व्यवधानों के दौरान त्वरित बहाली को सक्षम बनाएगी।

यह परियोजना ट्रेन परिचालन की सुरक्षा और विश्वसनीयता को बढ़ाएगी, समय की पाबंदी में सुधार करेगी और दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे नेटवर्क पर बढ़ते यात्री और माल यातायात को संभालने के लिए एक मजबूत तकनीकी आधार प्रदान करेगी।

यह मंजूरी भारतीय रेल के उस मौजूदा कार्यक्रम का हिस्सा है जिसके तहत उन्नत प्रौद्योगिकियों के माध्यम से राष्ट्रीय नेटवर्क में सिग्नलिंग सिस्टम का आधुनिकीकरण किया जा रहा है, जिससे सुरक्षित, स्मार्ट और अधिक कुशल रेल परिचालन सुनिश्चित हो सके।

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