जेनी प्रकरण पर गरमाई सियासत
अब इस पूरे घटनाक्रम में खुद जेनी का वीडियो सामने आने से राजनीतिक सरगर्मी और बढ़ गई है।

देहरादून। जेनी प्रकरण को लेकर भाजपा प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र भट्ट ने कहा कि उनका सवाल गलत नहीं था। प्रदेश की जनता जानना चाहती है कि जेनी के बच्चे का पिता कौन है। पूर्व मंत्री डॉ. हरक सिंह रावत डीएनए जांच कराने की बात कर रहे हैं तो वह खुद भी डीएनए जांच के लिए तैयार हैं। उन्होंने सवाल किया कि क्या हरक सिंह रावत दोबारा डीएनए जांच करवाएंगे? महेंद्र भट्ट ने नंदप्रयाग-घाट को लेकर लगाए गए आरोपों को भी निराधार बताया। उन्होंने कहा कि डॉ. हरक सिंह रावत को इस मामले में झूठे बयान नहीं देने चाहिए। भट्ट ने चेतावनी दी कि यदि हरक सिंह रावत ने इस तरह की बयानबाजी जारी रखी तो वह उनके खिलाफ मानहानि का मुकदमा दर्ज कराएंगे।
उत्तराखंड की राजनीति में करीब 23 साल पुराना जेनी प्रकरण एक बार फिर चर्चा के केंद्र में आ गया है। विधानसभा चुनाव से पहले इस पुराने मामले को लेकर भाजपा और कांग्रेस के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर तेज हो गया है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के बयान के बाद भाजपा प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र भट्ट और कांग्रेस नेता एवं पूर्व कैबिनेट मंत्री डॉ. हरक सिंह रावत के बीच जुबानी जंग छिड़ गई है। अब इस पूरे घटनाक्रम में खुद जेनी का वीडियो सामने आने से राजनीतिक सरगर्मी और बढ़ गई है।
वर्ष 2003 में तत्कालीन नारायण दत्त तिवारी सरकार के दौरान यह मामला उस समय सुर्खियों में आया था, जब असम से आई जेनी नाम की युवती ने देहरादून के एक सरकारी अस्पताल में बच्चे को जन्म दिया था। युवती ने उस समय के तत्कालीन राजस्व मंत्री डॉ. हरक सिंह रावत पर बच्चे का पिता होने का आरोप लगाया था। मामला विधानसभा तक पहुंचा और भारी राजनीतिक हंगामे के बीच हरक सिंह रावत ने मंत्री पद से इस्तीफा दे दिया था। इसके बाद तत्कालीन मुख्यमंत्री की ओर से मामले की सीबीआई जांच की संस्तुति की गई। जांच के दौरान डीएनए परीक्षण भी कराया गया। उपलब्ध मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, डीएनए नमूने मेल नहीं खाने पर हरक सिंह रावत को इस मामले में राहत मिली थी।
हाल के दिनों में अंकिता भंडारी प्रकरण को लेकर कांग्रेस द्वारा भाजपा पर लगातार सवाल उठाए जाने के बीच मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने पुराने जेनी प्रकरण का उल्लेख किया। इसके बाद भाजपा प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र भट्ट ने भी इस मामले को लेकर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि प्रदेश की जनता जानना चाहती है कि जेनी के बच्चे का पिता कौन था और उस समय लगाए गए आरोपों की सच्चाई क्या थी।
भाजपा के सवालों पर पूर्व मंत्री डॉ. हरक सिंह रावत ने पलटवार करते हुए कहा कि इस मामले में पहले ही सीबीआई जांच हो चुकी है और उनका डीएनए परीक्षण भी कराया गया था। उन्होंने कहा कि जांच में उन्हें राहत मिली थी। साथ ही उन्होंने महेंद्र भट्ट को भी डीएनए जांच कराने की चुनौती दी। दूसरी ओर महेंद्र भट्ट ने अपने सवालों को गलत मानने से इनकार करते हुए कहा कि यदि हरक सिंह रावत दोबारा डीएनए जांच की बात कर रहे हैं तो वह भी जांच के लिए तैयार हैं।
इस पूरे विवाद में नया मोड़ तब आया जब सोशल मीडिया पर एक महिला का वीडियो सामने आया, जो खुद को जेनी बता रही है। वीडियो में महिला ने कहा कि उसके नाम पर राजनीति की जा रही है और वर्ष 2003 में उसके साथ क्या हुआ था, इसकी जानकारी केवल उसे है। उसने दावा किया कि वह जल्द ही सबूतों के साथ सामने आकर अपनी बात रखेगी। हालांकि, वायरल वीडियो की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
जेनी के वीडियो के बाद उत्तराखंड की राजनीति में एक बार फिर हलचल तेज हो गई है। सवाल यह है कि क्या 23 साल पुराने इस प्रकरण से जुड़े नए तथ्य सार्वजनिक होंगे या यह मामला एक बार फिर राजनीतिक बयानबाजी तक ही सीमित रह जाएगा? फिलहाल भाजपा और कांग्रेस के बीच आरोप-प्रत्यारोप जारी हैं और प्रदेश की जनता की नजरें जेनी के कथित खुलासे तथा संबंधित पक्षों की अगली प्रतिक्रिया पर टिकी हैं।




