मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग को लेकर राजधानी में धरना
मुख्य चुनाव आयुक्त ने पूरी तरह खो दी अपनी नैतिक और संस्थागत साख : गौरव कुमार

संदीप गोयल\एस.के.एम. न्यूज़ सर्विस
देहरादून। मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के तत्काल इस्तीफे की मांग को लेकर वामपंथी, शिव सेना उत्तराखंड, जनतांत्रिक एवं सामाजिक संगठनों द्वारा गांधी पार्क में धरना दिया गया।
आज प्रातः 11:30 बजे वामपंथी, शिव सेना उत्तराखंड, जनतांत्रिक एवं सामाजिक संगठनों से जुड़े कार्यकर्ता राजधानी देहरादून के गांधी पार्क के मुख्य द्वार पर एकत्र हुये, जहां उन्होंने नारे बाजी करते हुये प्रदर्शन किया और धरना दिया। धरने में शामिल विभिन्न वामपंथी दलों, शिव सेना उत्तराखंड, जनतांत्रिक संगठनों, सामाजिक कार्यकर्ताओं, छात्र-युवा संगठनों, महिला संगठनों तथा नागरिक अधिकार समूहों के प्रतिनिधियों ने मुख्य चुनाव आयुक्त की कार्यप्रणाली को लेकर अपने विचार व्यक्त किये। धरने का उद्देश्य चुनाव आयोग की स्वतंत्रता, निष्पक्षता एवं विश्वसनीयता पर मंडरा रहे गंभीर संकट के प्रति जनता का ध्यान आकर्षित करना तथा मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के पद पर बने रहने के विरोध में जनता की आवाज़ को मुखर करना रहा। धरने के उपरांत दोपहर लगभग 1 बजे प्रदर्शनकारियो ने जिलाधिकारी के माध्यम से राष्ट्रपति को ज्ञापन प्रेषित किया।
इस अवसर पर अनन्त आकाश ने कहा की वर्तमान मुख्य चुनाव आयुक्त के कार्यकाल में चुनाव आयोग की संस्थागत स्वायत्तता, निष्पक्षता तथा संवैधानिक जिम्मेदारियों को गंभीर क्षति पहुँची है। लोकतंत्र के मूलभूत स्तंभ माने जाने वाले चुनाव आयोग पर जनता का विश्वास कमजोर हुआ है, जिसके गंभीर परिणाम देश के लोकतांत्रिक तंत्र पर पड़ रहे हैं। ऐसी परिस्थितियों में मुख्य चुनाव आयुक्त का पद पर बने रहना लोकतांत्रिक मर्यादाओं तथा जनहित के पूर्णतः विपरीत है। इसी पृष्ठभूमि में सभी वामपंथी, जनतांत्रिक एवं सामाजिक संगठन संयुक्त रूप से मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के तत्काल इस्तीफे की मांग करते हैं।
इस अवसर पर अपने विचार व्यक्त करते हुये शिव सेना उत्तराखंड के प्रदेश प्रमुख गौरव कुमार ने कहा की मुख्य चुनाव आयुक्त ने अपनी नैतिक और संस्थागत साख पूरी तरह खो दी है। इसके अलावा, यह आरोप भी लगाया गया कि वह अन्य दो चुनाव आयुक्तों की सहमति के बिना अकेले ही एक तरफा फैसले ले रहे थे, जो कि सामूहिक निर्णय के नियम का उल्लंघन है। उन्होंने कहा की फॉर्म 6 में संशोधन करने के लिए इसे संसद में लाना आवश्यक था, जो नहीं किया गया। उन्होंने कहा, “एसआईआर पूरी तरह से गैर-कानूनी है, इसलिए इसके तहत नाम जोड़ने और हटाने की सभी प्रक्रियाएं भी अवैध हो जाती हैं। देश को बचाने के लिए ज्ञानेश कुमार को तुरंत पद से हटाना होगा। एसआईआर प्रक्रिया के तहत देशभर से 13 करोड़ 30 लाख से अधिक वैध मतदाताओं के नाम मतदाता सूची से अवैध रूप से हटा दिए गए हैं। इन सभी नामों को तुरंत बहाल किया जाए।
धरने पर बैठने वालों में मुख्य रूप से सीपीएम केन्दीय कमेटी के सदस्य लेखराज, सीपीआई के राज्य सचिव कामरेड जगदीश कुडियाल, सीपीआई एम राज्यसचिव राजेंद्र पुरोहित, सीपीआई माले के राज्य सचिव इन्देश मैखुरी, राष्ट्रीय उत्तराखण्ड पार्टी के केन्द्रीय महामंत्री बालेश बबानिया, शिवसेना के राज्य प्रमुख गौरव कुमार, सीटू राज्यसचिव लेखराज, सपा नेता एसपी यादव, हेमा वोहरा, यूकेडी की नेता प्रमिला रावत, लताफत हुसैन, इंसानियत मंच के डा राधवेन्द, किसान सभा के राज्य महामंत्री भूपाल सिंह उपाध्यक्ष, सुरेंद्र सजवाण, डीएवी महाविद्यालय के उपाध्यक्ष शैलेन्द्र सिंह एसएफआई राष्ट्रीय संयुक्त मन्त्री अनिल ठाकुर, राज्याध्यक्ष नितिन मलेठा ने विचार व्यक्त किये है। सभा का संचालन जिलासचिव शिवप्रसाद देवली ने किया तथा समापन वरिष्ठ नेता एस एस नेगी ने की। इस अवसर अनन्त आकाश, शम्भू प्रसाद ममगाई, मनमोहन सिंह, मनमोहन, हिमांशु चौहान, रविंद्र नौडियाल, अभिषेक भण्डारी, शैलेन्द्र परमार, नुरैशा अंसारी, अर्जुन रावत, विप्लव अनन्त, अयाज खान, कनिका, कुसुम नौडियाल, अंजलि पुरोहित, सुरेशी नेगी, सुरेश कूमार, विकास रावत, शबनम, प्रिंयका विजय भट्ट, इन्देश नौटियाल, उदय ममगाई, एस एस रजवार, देवेन्द्र, नितिन आदि सैकडो की संखा में जनसंगठनों के कार्यकर्त्ता शामिल थे।




