स्वतंत्रता सेनानी परिवारों को दिया जाए संवैधानिक दर्जा : अवधेश पंत
सदस्यता फॉर्म संगठन के प्रांतीय कार्यालयों या समय-समय पर आयोजित होने वाले राज्य व राष्ट्रीय सम्मेलनों में भौतिक रूप से उपलब्ध कराए जाते हैं।

देहरादून, 28 सितम्बर। अखिल भारतीय स्वतंत्रता सेनानी एवं शहीद परिवार कल्याण महापरिषद (रजि.) के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष अवधेश पंत ने आज जानकारी देते हुये बताया की अखिल भारतीय स्वतंत्रता सेनानी एवं शहीद परिवार कल्याण महापरिषद (रजि.) स्वतंत्रता सेनानियों, शहीदों के परिवारों के कल्याण, सम्मान और उनकी लंबित समस्याओं के समाधान के लिए कार्य करने वाला एक राष्ट्रीय संगठन है। महापरिषद के राष्ट्रीय अध्यक्ष वरिष्ठ स्वतंत्रता सेनानी 102 वर्षीय भारत सरकार एमिनेंट कमेटी के पूर्व सदस्य डॉ. प्रहलाद प्रजापति और राष्ट्रीय महासचिव कुमार पटेल हैं। संगठन शुरू से ही देश के स्वतंत्रता सेनानी परिवारों को संवैधानिक दर्जा दिए जाने, उनकी सुरक्षा, देखभाल और सुविधाओं की व्यवस्था करने की मांग करता आ रहा है। संगठन द्वारा समय-समय पर सम्मेलनों, बैठकों और ज्ञापन कार्यक्रमों का आयोजन किया जाता है। हाल ही में उत्तराखंड के हल्द्वानी में स्वतंत्रता सेनानी सदन के निर्माण के लिए भूमि आवंटन की मांग को लेकर मुख्यमंत्री को ज्ञापन सौंपा गया है।
अखिल भारतीय स्वतंत्रता सेनानी एवं शहीद परिवार कल्याण महापरिषद के द्वारा हाल के वर्षों में संगठन की मजबूती और सेनानी परिवारों की मांगों को लेकर कई महत्वपूर्ण बैठकें और राष्ट्रीय सम्मेलन आयोजित किए गए हैं। महापरिषद का तीन दिवसीय राष्ट्रीय सम्मेलन नई दिल्ली में आयोजित किया गया था, जिसमें देशभर से स्वतंत्रता सेनानियों के उत्तराधिकारियों और आश्रितों ने हिस्सा लिया। इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य केंद्र सरकार के समक्ष सेनानी परिवारों की लंबित मांगों को उठाना था। झारखंड के रांची (हरमू स्थित दिगंबर जैन सभागार) में महापरिषद की चौथी राष्ट्रीय कार्यकारिणी बैठक संपन्न हुई थी। इस बैठक में देश के 22 राज्यों से राष्ट्रीय कोर कमेटी के सदस्यों, राष्ट्रीय पदाधिकारियों और महिला समन्वयकों सहित कई जिलों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया था। उत्तराखंड के हरिद्वार में राष्ट्रीय स्तर के स्वतंत्रता सेनानी उत्तराधिकारी सम्मेलन का आयोजन किया गया था। इस सम्मेलन में देश भर से सेनानी परिवारों के सदस्यों ने भाग लेकर नैतिक मूल्यों की स्थापना और अपनी सुरक्षा व देखभाल से जुड़े मुद्दों पर चर्चा की थी। स्वतंत्रता सेनानी परिवारों को संवैधानिक दर्जा दिया जाए, जिससे लगभग 2 करोड़ सेनानी परिवारों को उचित सुरक्षा और देखभाल मिल सके। संगठन द्वारा विभिन्न राज्यों जैसे बिहार, उत्तराखंड, झारखंड में लगातार प्रांतीय बैठकें कर राज्य सरकारों को स्थानीय स्तर पर सेनानी सदनों के निर्माण और आश्रितों को सरकारी सुविधाओं व आरक्षण का लाभ देने के लिए दबाव बनाया जा रहा है।
महापरिषद की सदस्यता मुख्य रूप से भारत के स्वतंत्रता सेनानियों के उत्तराधिकारियों, आश्रितों और शहीदों के परिवारों के लिए है। स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों के पुत्र, पुत्री, पौत्र, पौत्री या उनके निकटतम कानूनी उत्तराधिकारी इसके सदस्य बन सकते हैं। सदस्यता के लिए आवेदन करते समय मुख्य रूप से स्वतंत्रता सेनानी प्रमाण पत्र, उत्तराधिकारी होने का कानूनी साक्ष्य और पारिवारिक पहचान पत्र की आवश्यकता होती है। सदस्यता फॉर्म संगठन के प्रांतीय कार्यालयों या समय-समय पर आयोजित होने वाले राज्य व राष्ट्रीय सम्मेलनों में भौतिक रूप से उपलब्ध कराए जाते हैं।
अखिल भारतीय स्वतंत्रता सेनानी एवं शहीद परिवार कल्याण महापरिषद (रजि.) के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष अवधेश पंत ने बताया की महापरिषद देश एवं विदेश में विभिन्न क्षेत्र में समाज सेवाए एव देश के प्रति समर्पित भाव से कार्य कर रहे हैं प्रतिष्ठित लोगों को विशेष आमंत्रित के तौर परिषद से जोड़ने का भी कार्य कर रहा है। देश के 19 प्रदेशों से महा परिषद में नियुक्त राष्ट्रीय उपाध्यक्ष राष्ट्रीय समन्वयक हरि राम गुप्ता के निर्देशन में संगठन को गति प्रदान कर रहे हैं। महा परिषद की महत्वपूर्ण उपलब्धि संपूर्ण राष्ट्र एवं देश के बाहर भी महिलाओं को बराबर का प्रतिनिधित्व देते हुए राष्ट्रीय महिला समन्वयक दिल्ली में समाज सेवा को समर्पित श्रीमती इंदिरा मिश्रा के नेतृत्व में महिलाओं का विशाल समूह महापरिषद को गति प्रदान कर रहा है। भारत सरकार के नीति आयोग से संबद्धता का महत्वपूर्ण कार्य प्रगति की ओर अग्रसर है। महा परिषद स्वतंत्रता सेनानी परिवारों के हित की लड़ाई ही नहीं, अपितु समस्त देश में विकास सर्व धर्म समभाव एवं जन सेवा हेतु प्रयत्नशील है।




