रक्षा मंत्री ने आतंकवाद के संपूर्ण तंत्र को नष्ट करने के लिए एकजुट कार्रवाई का आह्वान किया
अधिक संस्थानों का होना जरूरी नहीं कि अधिक उपलब्धियों को भी दर्शाता हो।

नई दिल्ली। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) के सदस्य देशों से आतंकवाद के संपूर्ण तंत्र को समाप्त करने के लिए समन्वित प्रयास करने का आह्वान किया है, और इसे शांति और विकास के लिए सबसे गंभीर खतरों में से एक बताया है। वे ताजिकिस्तान के दुशांबे में एससीओ के राष्ट्राध्यक्षों की परिषद (सीएचजी) की 25वीं बैठक को संबोधित कर रहे थे। रक्षा मंत्री ने कहा, “आतंकवाद निर्दोष लोगों की जान लेता है और निवेश एवं व्यापार को बाधित करता है। यह समाजों को कट्टरपंथी बनाता है और युवाओं को उन अवसरों से वंचित करता है जिनके वे हकदार हैं। आतंकवाद का कोई औचित्य नहीं हो सकता, इससे निपटने में कोई दोहरा मापदंड नहीं हो सकता और आतंकवादियों को वित्तपोषण, समर्थन या सुरक्षित पनाहगाह प्रदान करने वालों के लिए कोई जगह नहीं है।” श्री राजनाथ सिंह ने अगस्त-सितंबर 2026 में बिश्केक में आयोजित एससीओ शिखर सम्मेलन में हुई चर्चाओं को याद किया, जब प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने सुरक्षा, संपर्क और अवसरों से संबंधित मुद्दों पर संगठन द्वारा ठोस कदम उठाने की आवश्यकता पर बल दिया था। रक्षा मंत्री ने भारत के इस विश्वास को रेखांकित किया कि आर्थिक सहयोग समावेशी और सभी सदस्य देशों के लिए पारस्परिक रूप से लाभकारी होना चाहिए। उन्होंने कहा, “भारत का मानना है कि एससीओ को संप्रभु समानता, सहमति और पारस्परिक सम्मान के सिद्धांतों का पालन करते हुए कुशल और दृढ़ रहना चाहिए। अधिक संस्थानों का होना जरूरी नहीं कि अधिक उपलब्धियों को भी दर्शाता हो। नए तंत्रों को स्पष्ट रूप से पहचानी गई आवश्यकताओं पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए, दोहराव से बचना चाहिए और सदस्य देशों को व्यावहारिक लाभ पहुंचाने को प्राथमिकता देनी चाहिए।” रक्षा मंत्री ने भू-राजनीतिक तनाव, व्यापार और आपूर्ति श्रृंखलाओं में व्यवधान, ऊर्जा और खाद्य सुरक्षा संबंधी चिंताओं और उभरते तकनीकी अंतरों से चिह्नित अनिश्चित वैश्विक आर्थिक वातावरण से निपटने के लिए सामाजिक सहयोग संघ (एससीओ) द्वारा आम सहमति बनाने और उसे ठोस कार्रवाई में बदलने की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने कहा कि लचीली आपूर्ति श्रृंखलाओं को मजबूत करने, व्यापार और निवेश को सुगम बनाने और विकास को गति देने के लिए प्रौद्योगिकी का लाभ उठाने की आवश्यकता है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि आर्थिक सहयोग का लाभ समाज के सभी वर्गों तक पहुंचना चाहिए और 2026-2030 की अवधि के लिए बहुपक्षीय व्यापार और आर्थिक सहयोग कार्यक्रम की कार्य योजना को अपनाने के लिए भारत के समर्थन की पुष्टि की। श्री राजनाथ सिंह ने बिश्केक में एससीओ शिखर सम्मेलन में लिए गए उन निर्णयों का स्वागत किया, जिनके तहत ताशकेंट में यूनिवर्सल सेंटर और दुशांबे में एंटी-ड्रग सेंटर को संगठन के स्थायी निकायों के रूप में स्थापित किया गया है। उन्होंने कहा कि इनकी प्रभावशीलता कुशल समन्वय और कार्यों के समय पर निष्पादन पर निर्भर करेगी। साझा समृद्धि के लिए संपर्क के महत्व पर जोर देते हुए रक्षा मंत्री ने कहा कि भारत उन पहलों का समर्थन करता है जो बाजारों को जोड़ती हैं, व्यापार को सुगम बनाती हैं और विकास के नए रास्ते खोलती हैं। उन्होंने कहा कि अंतर्राष्ट्रीय उत्तर-दक्षिण परिवहन गलियारा और चाबहार बंदरगाह जैसी पहलें मध्य एशिया को व्यापक बाजारों से जोड़ने में महत्वपूर्ण योगदान दे सकती हैं। श्री राजनाथ सिंह ने इस बात पर जोर दिया कि संपर्क व्यवस्था परामर्श और सभी देशों की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता के सम्मान पर आधारित होनी चाहिए, और कहा कि इन सिद्धांतों पर आधारित न होने वाली परियोजनाएं टिकाऊ नहीं होंगी। उन्होंने सीमा शुल्क प्रक्रियाओं को सरल बनाकर, डिजिटल दस्तावेज़ीकरण को बढ़ावा देकर, रसद व्यवस्था में सुधार करके और परस्पर संचालन योग्य डिजिटल समाधान अपनाकर पूरे क्षेत्र में व्यापार की लागत को कम करने के लिए भौतिक संपर्क व्यवस्था से आगे बढ़ने की आवश्यकता पर बल दिया। रक्षा मंत्री ने इस महीने की शुरुआत में मुंबई में आयोजित मध्य एशिया में अवसंरचना परियोजनाओं के वित्तपोषण पर संगोष्ठी का उल्लेख किया और मध्य एशियाई देशों और एससीओ भागीदारों की सक्रिय भागीदारी के लिए आभार व्यक्त किया। उन्होंने पहली बार आयोजित एससीओ एशियाई आर्थिक संवाद के आयोजन की भी सराहना की। श्री राजनाथ सिंह ने कहा, “हमारी सफलता का माप युवाओं के लिए सृजित अवसरों, उद्यमियों के लिए खोले गए नए बाजारों, किसानों और लघु व्यवसाय मालिकों को उपलब्ध कराई गई प्रौद्योगिकियों और समाजों के बीच विकसित किए गए संबंधों के आधार पर किया जाना चाहिए।” रक्षा मंत्री ने इस बात पर ज़ोर दिया कि भारत का अपना विकास अनुभव प्रौद्योगिकी और नवाचार की परिवर्तनकारी क्षमता को दर्शाता है, जो विकास को गति प्रदान करते हैं और समस्याओं का समाधान करते हैं। उन्होंने देश के डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना पर प्रकाश डाला, जिसने सार्वजनिक सेवा वितरण में क्रांति ला दी है और वित्तीय समावेशन को बढ़ावा दिया है। उन्होंने आगे कहा कि भारत ने विश्व के सबसे बड़े स्टार्टअप पारिस्थितिकी तंत्रों में से एक का निर्माण किया है, और महिलाओं के नेतृत्व वाले विकास पर राष्ट्र का ज़ोर इस विश्वास पर आधारित है कि विकास की दिशा तय करने में महिलाएं एक निर्णायक भूमिका निभाती हैं। श्री राजनाथ सिंह ने इस बात पर जोर दिया कि भारत की वैश्विक पहलें, जैसे कि अंतर्राष्ट्रीय सौर गठबंधन और आपदा प्रतिरोधी अवसंरचना गठबंधन, किफायती स्वच्छ ऊर्जा और जलवायु-अनुकूल विकास में योगदान देती हैं। उन्होंने आगे कहा कि मिशन लाइफ टिकाऊ जीवनशैली और जिम्मेदार उपभोग को बढ़ावा देता है, जबकि वैश्विक जैव ईंधन गठबंधन स्वच्छ और अधिक टिकाऊ ऊर्जा समाधानों को प्रोत्साहित करता है। रक्षा मंत्री ने एससीओ से पिछले 25 वर्षों में स्थापित मजबूत नींव पर आगे बढ़ने और सर्वसम्मति आधारित सहयोग और ठोस परिणामों पर केंद्रित एक दूरदर्शी रोडमैप तैयार करने का आग्रह किया। उन्होंने इन उद्देश्यों को प्राप्त करने के लिए सभी सदस्य देशों के साथ मिलकर काम करने की भारत की प्रतिबद्धता को दोहराया। उन्होंने सदस्य देशों को इस वर्ष के अंत में भारत द्वारा आयोजित किए जा रहे पहले एससीओ सभ्यतागत संवाद मंच में भाग लेने के लिए आमंत्रित किया। बैठक में एससीओ सदस्य देशों के बीच बहुपक्षीय आर्थिक और व्यापार सहयोग में हुई प्रगति की समीक्षा की गई और परिवहन, वित्त, डिजिटल अर्थव्यवस्था और सामाजिक विकास जैसे क्षेत्रों में सहयोग को और मजबूत करने के उपायों पर चर्चा की गई। प्रतिनिधिमंडलों के प्रमुखों ने एससीओ परिषद के राष्ट्राध्यक्षों की 25वीं बैठक के संयुक्त विज्ञप्ति को अपनाया, जिसमें 2027 के लिए एससीओ बजट, संबंधित वित्तीय और प्रशासनिक निर्णय और 2026-2030 के लिए पीएमटीईसी कार्य योजना शामिल है। एससीओ सीएचजी संगठन का एक महत्वपूर्ण तंत्र है जो सदस्य देशों के बीच आर्थिक और अन्य व्यावहारिक सहयोग क्षेत्रों को बढ़ावा देने के लिए जिम्मेदार है। भारत 2017 से एससीओ का पूर्ण सदस्य है और इसके विभिन्न तंत्रों में सक्रिय रूप से भाग लेता रहता है।




